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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 234
 
 
श्लोक  2.15.234 
एइत आसने वसि’ करह भोजन ।
प्रभु कहे, - पूज्य एई कृष्णेर आसन ॥234॥
 
 
अनुवाद
“अब कृपया इस स्थान पर बैठें और अपना दोपहर का भोजन करें।”
 
“Now please sit in this place and eat.” Chaitanya replied, “This place is worthy of worship because it has been used.”
तात्पर्य
चैतन्य महाप्रभु ने जवाब दिया, "यह जगह इसलिए पूजनीय है क्योंकि कृष्ण द्वारा इसका उपयोग किया गया था।"

शिष्टाचार के अनुसार, कृष्ण द्वारा उपयोग की गई चीजों का उपयोग किसी और को नहीं करना चाहिए। इसी तरह, आध्यात्मिक गुरु द्वारा उपयोग की गई चीजों का उपयोग भी किसी और को नहीं करना चाहिए। यही शिष्टाचार है। कृष्ण या आध्यात्मिक गुरु द्वारा उपयोग की जाने वाली हर चीज पूजनीय है। विशेष रूप से, उनके बैठने या खाने के स्थानों का उपयोग किसी और को नहीं करना चाहिए। एक भक्त को इसका पालन करने के लिए बहुत सावधान रहना चाहिए।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)