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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 221
 
 
श्लोक  2.15.221 
अमृत - गुटिका, पिठा - पाना आनाइल ।
जगन्नाथ - प्रसाद सब पृथक्धरिल ॥221॥
 
 
अनुवाद
सार्वभौम भट्टाचार्य ने भगवान जगन्नाथ को अर्पित किए जाने वाले कई प्रकार के भोजन भी शामिल किए। इनमें अमृत-गुटिका नामक मीठी गोलियाँ, मीठे चावल और केक शामिल थे। ये सभी अलग-अलग रखे गए थे।
 
Sarvabhauma Bhattacharya also included various delicacies offered to Lord Jagannath. These included amrit gutika, kheer, and cakes. These were kept separate.
तात्पर्य
हालांकि जगन्नाथ द्वारा छोड़े गए भोजन के अवशेष भट्टाचार्य के घर में लाए गए थे, लेकिन उन्हें उनके द्वारा अपने घर पर किए गए तैयारियों से अलग रखा गया था। कभी-कभी ऐसा होता है कि प्रसाद को अधिक मात्रा में भोजन के साथ मिलाया जाता है और फिर वितरित किया जाता है, लेकिन इस मामले में हम पाते हैं कि सर्वभौम भट्टाचार्य ने जगन्नाथ-प्रसाद को अलग रखा था। उन्होंने इसे विशेष रूप से भगवान चैतन्य महाप्रभु को संतुष्ट करने के लिए अलग रखा।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)