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श्लोक 2.15.209  |
केयापत्र - कलाखोला - डोङ्गा सारि सारि ।
चारि - दिके धरियाछे नाना व्यञ्जन भरि’ ॥209॥ |
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| अनुवाद |
| केले के पेड़ की छाल और केया पौधे के पत्तों से बने कई गमले थे। इन गमलों में तरह-तरह की पकी हुई सब्ज़ियाँ भरकर पत्तों के चारों तरफ़ रखी हुई थीं। |
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| There were many bowls made of banana bark and keya leaves. These were filled with various vegetables and placed around the plate. |
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