श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 209
 
 
श्लोक  2.15.209 
केयापत्र - कलाखोला - डोङ्गा सारि सारि ।
चारि - दिके धरियाछे नाना व्यञ्जन भरि’ ॥209॥
 
 
अनुवाद
केले के पेड़ की छाल और केया पौधे के पत्तों से बने कई गमले थे। इन गमलों में तरह-तरह की पकी हुई सब्ज़ियाँ भरकर पत्तों के चारों तरफ़ रखी हुई थीं।
 
There were many bowls made of banana bark and keya leaves. These were filled with various vegetables and placed around the plate.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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