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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 207
 
 
श्लोक  2.15.207 
बत्तिशा - आठिया कलार आङ्गटिया पाते ।
तिन - मान तण्डुलेर उभारिल भाते ॥207॥
 
 
अनुवाद
सबसे पहले, तीन मन पके हुए चावल - लगभग छह पाउंड - को एक बड़े केले के पत्ते पर डाला गया।
 
First, three maunds (about 6 pounds) of cooked rice was served on a large banana leaf.
तात्पर्य
यह श्री चैतन्य महाप्रभु के लिए बनाए गए भोजन के वर्णन की शुरुआत है। यह वर्णन कविराज गोस्वामी ने दिया है, जो माना जाता है कि एक विशेषज्ञ रसोइए थे जो जानते थे कि खाना कैसे बनाया जाता है और कैसे परोसा जाता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)