श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 138
 
 
श्लोक  2.15.138 
पूर्वे आमि इँहारे लोभाइल बार बार ।
परम मधुर, गुप्त, व्रजेन्द्र कुमार ॥138॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "पहले मैंने मुरारीगुप्त को बार-बार भगवान कृष्ण के आकर्षण में डाला था। मैंने उनसे कहा था, 'मेरे प्रिय गुप्त, भगवान श्रीकृष्ण, व्रजेंद्रकुमार, परम माधुर्य हैं।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said, "Before this, I repeatedly encouraged Murari Gupta to be attracted to Krishna. I told him, 'O Gupta, Vrajendra's son, Sri Krishna, is extremely sweet.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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