श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 133
 
 
श्लोक  2.15.133 
सार्वभौम, विद्या - वाचस्पति, - दुइ भाइ ।
दुइ - जने कृपा करि’ कहेन गोसाञि ॥133॥
 
 
अनुवाद
अपनी अहैतुकी कृपा से श्री चैतन्य महाप्रभु ने सार्वभौम भट्टाचार्य और विद्यावाचस्पति नामक भाइयों को निम्नलिखित निर्देश दिए।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu, by His causeless mercy, gave the following orders to these two brothers – Sarvabhauma Bhattacharya and Vidyavachaspati.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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