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श्लोक 115
श्लोक
2.15.115
मुकुन्द कहे, - रघुनन्दन मोर ‘पिता’ हय ।
आमि तार ‘पुत्र’, - एइ आमार निश्चय ॥115॥
अनुवाद
मुकुंद ने उत्तर दिया, "रघुनंदन मेरे पिता हैं और मैं उनका पुत्र हूँ। यह मेरा निर्णय है।"
Mukunda replied, "Raghunandan is my father, and I am his son. This is my conviction."
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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