भक्त - गण - सङ्गे प्रभु उद्याने आसिया ।
वृन्दावन - विहार करे भक्त - गण लञा ॥96॥
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अनुवाद
अपने भक्तों के साथ श्री चैतन्य महाप्रभु बगीचे में गए और वृन्दावन की लीलाओं का आनन्द लिया।
Then Sri Chaitanya Mahaprabhu went to the garden with His devotees and there He enjoyed the Vrindavana-lila.
तात्पर्य
श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर ने बताया है कि यह वृंदावन विहार कृष्ण का गोपियों के साथ मिश्रण या परकीय रस के दिव्य भाव का उल्लेख नहीं करता है। जगन्नाथ पुरी के उद्यान में श्री चैतन्य महाप्रभु के वृंदावन लीला में महिलाओं या अन्य लोगों की पत्नियों के साथ जुड़ाव शामिल नहीं था, जैसा कि श्री कृष्ण ने किया था। श्री चैतन्य महाप्रभु ने अपने वृंदावन लीला में, खुद को श्रीमती राधारानी का सहायक माना था। जब श्रीमती राधारानी कृष्ण की संगति का आनंद लेती थीं, तो उनकी दासीयां बहुत प्रसन्न होती थीं। श्री चैतन्य महाप्रभु के जगन्नाथ के उद्यान में वृंदावन विहार की तुलना गौरंग-नगरियों की गतिविधियों से नहीं करनी चाहिए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥