श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  2.14.85 
गोपीनाथ कहे , - तोमार कृपा - महासिन्धु ।
उछलित करे यबे तार एक बिन्दु ॥85॥
 
 
अनुवाद
गोपीनाथ आचार्य ने उत्तर दिया, "मैं विश्वास करता हूँ कि आपकी महान दया के सागर की एक बूँद उन पर उमड़ पड़ी है।
 
Gopinath Acharya replied, “I think a drop of the ocean of your great grace has jumped and fallen on him.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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