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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.14.5 
सार्वभौम - उपदेशे छाड़ि’ राज - वेश ।
एकला वैष्णव - वेशे करिल प्रवेश ॥5॥
 
 
अनुवाद
सार्वभौम भट्टाचार्य के आदेशानुसार, राजा ने अपना राजसी वस्त्र त्याग दिया था। अब वे वैष्णव वेश में उद्यान में प्रवेश कर गए।
 
As per the advice of Sarvabhauma Bhattacharya, the king gave up his royal attire and now entered the garden in Vaishnava attire.
तात्पर्य
कभी-कभी अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ के सदस्यों को - विशेष रूप से पश्चिमी देशों में - लोगों को पुस्तकें वितरित करने के लिए उनसे संपर्क करना मुश्किल हो जाता है क्योंकि लोग भक्तों के पारंपरिक केसरिया वस्त्रों से अपरिचित होते हैं। इसलिए भक्तों ने पूछताछ की है कि क्या वे आम जनता के सामने यूरोपीय और अमेरिकी पोशाक पहन सकते हैं। सर्वभौम भट्टाचार्य द्वारा राजा प्रतापरुद्र को दिए गए निर्देशों से हम समझ सकते हैं कि हम अपनी सेवा को सुविधाजनक बनाने के लिए अपनी पोशाक को किसी भी तरह से बदल सकते हैं। जब हमारे सदस्य जनता से मिलने या हमारी पुस्तकों का परिचय देने के लिए अपनी पोशाक बदलते हैं, तो वे भक्ति संबंधी सिद्धांतों को नहीं तोड़ते हैं। वास्तविक सिद्धांत कृष्ण भावनामृत आंदोलन को फैलाने का है, और यदि किसी को इस उद्देश्य के लिए नियमित पश्चिमी पोशाक में बदलना है, तो इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)