श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.14.37 
केया - पत्र - द्रोणी आइल बोझा पाँच - सात ।
एक एक जने दश दोना दिल , - एत पात ॥37॥
 
 
अनुवाद
फिर केतकी के पत्तों से बनी पाँच-सात थालियाँ आईं। हर आदमी को दस-दस थालियाँ दी गईं, और इस तरह पत्तों से बनी थालियाँ बाँट दी गईं।
 
Then came five or seven loads of plates made from the leaves of the Ketaki tree. Each person was given ten such plates, and thus the leaf plates were distributed.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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