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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.14.34 
लेम्बु - कुल - आदि नाना - प्रकार आचार ।
लिखिते ना पारि प्रसाद कतेक प्रकार ॥34॥
 
 
अनुवाद
वहाँ तरह-तरह के अचार भी थे—नींबू का अचार, बेर का अचार वगैरह। सचमुच, मैं भगवान जगन्नाथ को अर्पित किए गए व्यंजनों की विविधता का वर्णन नहीं कर सकता।
 
There were also many kinds of pickles – like lemon pickle, plum pickle, etc. I am not able to describe the variety of dishes offered to Lord Jagannathji.
तात्पर्य
26-34वें छंद में, लेखक ने भगवान जगन्नाथ को चढ़ाए जाने वाले विभिन्न खाद्य पदार्थों का वर्णन किया है। उन्होंने यथासंभव उनका वर्णन किया है, लेकिन अंत में वे उन्हें पूरी तरह से वर्णन करने में अपनी अक्षमता स्वीकार करते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)