श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.14.31 
पद्मचिनि, चन्द्रका न्ति, खाजा, खण्डसार ।
वियरि, कह्मा, तिलाखाजार प्रकार ॥31॥
 
 
अनुवाद
वहां कमल के फूल की चीनी, उड़द दाल से बनी एक प्रकार की रोटी, कुरकुरी मिठाइयां, मिश्री, तले हुए चावल की मिठाइयां, तिल की मिठाइयां और तिल से बनी कुकीज़ थीं।
 
It included Kamalchini, Bada, Khaja, Khandsari, Viari (sweet made from fried rice), Kadma (sweet made from sesame seeds) and Tilkhaja ​​(sweet made from sesame seeds).
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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