श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.14.28 
मनोहरा - लाड़ आदि शतेक प्रकार ।
अमृत - गुटिका - आदि, क्षीरसा अपार ॥28॥
 
 
अनुवाद
वहाँ सैकड़ों प्रकार की मिठाइयाँ थीं जैसे मनोहरा-लाडू, अमृत-गुटिका जैसी मिठाइयाँ और विभिन्न प्रकार के गाढ़े दूध।
 
It contained hundreds of types of sweets like Manohar Laddus, sweets like Amrit Gutika and many varieties of milk.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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