श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 236
 
 
श्लोक  2.14.236 
नित्यानन्द देखिया प्रभुर भावावेश ।
निकटे ना आइसे, रहे किछु दूर - देश ॥236॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु के आनंदमय प्रेम को देखकर नित्यानंद प्रभु निकट नहीं आये, बल्कि थोड़ी दूरी पर ही खड़े रहे।
 
Seeing the emotional state of Sri Chaitanya Mahaprabhu, Nityananda Prabhu did not go near him and remained at some distance.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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