| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 2: मध्य लीला » अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन » श्लोक 229 |
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| | | | श्लोक 2.14.229  | शुनि’ प्रेमावेशे नृत्य करे श्रीनिवास ।
कक्ष - तालि बाजाय, करे अट्ट - अट्ट हास ॥229॥ | | | | | | | अनुवाद | | तब श्रीवास ठाकुर प्रेमोन्मत्त होकर नाचने लगे। वे अपनी हथेलियों से अपनी बगलों पर थपथपाकर ध्वनि उत्पन्न करने लगे और ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे। | | | | Then Srivasa Thakura, overwhelmed with love, began to dance. He began to slap his armpits with his palms and laugh loudly. | | ✨ ai-generated | | |
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