श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.14.22 
दण्डवत्क रि’ राजा बाहिरे चलिला ।
योड़ हस्त करि’ सब भक्तेरे वन्दिला ॥22॥
 
 
अनुवाद
हाथ जोड़कर भक्तों को नमस्कार करते हुए तथा श्री चैतन्य महाप्रभु को नमस्कार करते हुए राजा बाहर चले गए।
 
The king went out with folded hands, bowed to the devotees and saluted Sri Chaitanya Mahaprabhu in a very humble manner.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)