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श्लोक 2.14.201  |
एइ - मत आर सब भाव - विभूषण ।
याहाते भूषित राधा हरे कृष्ण मन ॥201॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार श्रीमती राधारानी विविध आनंदमय लक्षणों से अलंकृत एवं सुसज्जित हैं, जो श्रीकृष्ण के मन को आकर्षित करते हैं। |
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| “Thus Srimati Radharani is adorned and decorated with the various expressions of love that attract the mind of Sri Krishna. |
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