| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 2: मध्य लीला » अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन » श्लोक 20 |
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| | | | श्लोक 2.14.20  | ‘राजा’ - हेन ज्ञान कभु ना कैल प्रकाश ।
अन्तरे सकल जानेन, बाहिरे उदास ॥20॥ | | | | | | | अनुवाद | | यद्यपि चैतन्य महाप्रभु अपने हृदय में जो कुछ हो रहा था, उसे जानते थे, परन्तु बाह्य रूप से उन्होंने इसे प्रकट नहीं किया। न ही उन्होंने यह प्रकट किया कि वे जानते थे कि वे राजा प्रतापरुद्र से बात कर रहे थे। | | | | Although Mahaprabhu was aware of what was happening, he did not reveal it outwardly. Nor did he reveal that he knew that he was speaking to King Prataparudra. | | ✨ ai-generated | | |
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