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अनुवाद
राजा ने उत्तर दिया, "हे प्रभु, मैं आपके सेवकों में सबसे आज्ञाकारी सेवक हूँ। मेरी यही कामना है कि आप मुझे अपने सेवकों का सेवक स्वीकार करें।"
The king replied, "Lord, I am the most obedient of your servants. I wish that you would accept me as the slave of your slaves."
तात्पर्य
एक भक्त के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि भगवान् के सेवक के सेवक बनना होता है। वास्तव में, किसी को भी भगवान् का सीधा सेवक बनने की इच्छा नहीं रखनी चाहिए। यह कोई अच्छी बात नहीं है। जब प्रहलाद महाराज को नृसिंहदेव द्वारा वरदान दिया गया तो प्रहलाद ने हर तरह के भौतिक वरदानों को ठुकरा दिया लेकिन उन्होंने भगवान के दासों के सेवक बनने की प्रार्थना की। जब ध्रुव महाराज को देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर द्वारा वरदान दिया गया तो ध्रुव असीमित भौतिक संपत्ति मांग सकते थे लेकिन उन्होंने केवल भगवान के दासों के सेवक बनने का वरदान मांगा। खोलावेचा श्रीधर एक बहुत गरीब आदमी था लेकिन जब श्री चैतन्य महाप्रभु उसे वरदान देना चाहते थे तो उन्होंने भी भगवान से भगवान के दासों के सेवक के रूप में रहने का आशीर्वाद मांगा। अंत में, भगवान के परम व्यक्तित्व की सेवा करने का सेवक होना सबसे बड़ा आशीर्वाद होता है जो कोई चाह सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥