श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 176
 
 
श्लोक  2.14.176 
गर्व, अभिलाष, भय, शुष्क - रुदित ।
क्रोध, असूया हय, आर मन्द - स्मित ॥176॥
 
 
अनुवाद
महाभाव के सात सम्मिलित तत्व हैं - अभिमान, महत्वाकांक्षा, भय, शुष्क कृत्रिम रोना, क्रोध, ईर्ष्या और हल्की मुस्कान।
 
“Mahabhaav has seven elements – pride, desire, fear, artificial crying, anger, jealousy and a gentle smile.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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