मान-ग्रहे सदोद्युक्ता तच्छैथिल्ये च कोपना
अभेद्या नायके प्रायः क्रूरा वामेति कीर्त्यते
"जो गोपी हमेशा ईर्ष्यालु क्रोध करने के लिए उत्सुक रहती है, जो उस स्थिति के लिए बहुत उत्साही होती है, जो हारने पर तुरंत क्रोधित हो जाती है, जो किसी नायक के नियंत्रण में कभी नहीं रहती और हमेशा उसका विरोध करती है उसे वामा या बाएँ पक्ष की गोपी कहा जाता है।"
श्रील रूप गोस्वामी दाएँ पक्ष की गोपियों का वर्णन इस प्रकार करते हैं:
असह्या मान-निर्बन्धे नायके युक्त-वादिनी
साम्याभिस तेन भेद्या च दक्षिणा परिकीर्तिता
"जो गोपी महिला क्रोध को बर्दाश्त नहीं कर सकती, जो नायक से उचित शब्द बोलती है और उसके मीठे शब्दों से संतुष्ट हो जाती है उसे दक्षिणा या दाएँ पक्ष की गोपी कहा जाता है।"
