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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 158
 
 
श्लोक  2.14.158 
सिषेव आत्मन्यवरुद्ध - सौरतः ।
सर्वाः शरत्काव्य - कथा - रसाश्रयाः ॥158॥
 
 
अनुवाद
"भगवान श्रीकृष्ण, जो परम सत्य हैं, शरद ऋतु में प्रत्येक रात्रि अपने रास नृत्य का आनंद लेते थे। वे यह नृत्य चांदनी में और पूर्ण दिव्य मधुरता के साथ करते थे। वे काव्यात्मक शब्दों का प्रयोग करते थे और अपने चारों ओर ऐसी स्त्रियों को रखते थे जो उनकी ओर अत्यधिक आकर्षित होती थीं।"
 
"The Supreme Truth, Lord Krishna, enjoyed the Rasa dance every night during the autumn season. He performed it on moonlit nights, completely immersed in divine bliss. He used poetic words and was surrounded by women who were deeply attracted to him."
तात्पर्य
यह श्लोक श्रीमद-भागवतम् (10.33.25) का उद्धरण है। गोपियाँ सभी पारलौकिक आध्यात्मिक आत्माएँ हैं। किसी को यह कभी नहीं सोचना चाहिए कि गोपियों और कृष्ण के भौतिक शरीर हैं। वृंदावन-धाम भी एक आध्यात्मिक निवास है, और वहाँ के दिन और रात, पेड़, फूल और पानी, और अन्य सभी चीजें आध्यात्मिक हैं। वहाँ भौतिक संदूषण का नामो-निशान नहीं है। कृष्ण, जो परम ब्रह्म और परमात्मा हैं, उन्हें भौतिक चीजों में कोई दिलचस्पी नहीं है। गोपियों के साथ उनकी सारी गतिविधियाँ आध्यात्मिक हैं और आध्यात्मिक दुनिया के भीतर होती हैं। उनका भौतिक दुनिया से कोई लेना-देना नहीं है। भगवान श्री कृष्ण की कामुक इच्छाएँ और गोपियों के साथ उनके सारे व्यवहार आध्यात्मिक स्तर पर हैं। कृष्ण और गोपियों के प्रेम-प्रसंगों का आनंद लेने से पहले किसी को आध्यात्मिक रूप से बोध होना चाहिए। सांसारिक स्तर पर रहने वाले को पहले नियमन सिद्धांतों का पालन करके स्वयं को शुद्ध करना होगा। तभी वह कृष्ण और गोपियों को समझने का प्रयास कर सकता है। श्री चैतन्य महाप्रभु और स्वरूप दामोदर गोस्वामी यहाँ कृष्ण और गोपियों के बीच के संबंध के बारे में बात कर रहे हैं; इसलिए विषय न तो सांसारिक है और न ही कामुक है। एक संन्यासी होने के नाते, श्री चैतन्य महाप्रभु महिलाओं के साथ अपने व्यवहार में बहुत सख्त थे। जब तक गोपियाँ आध्यात्मिक स्तर पर न हों, तब तक श्री चैतन्य महाप्रभु ने कभी भी स्वरूप दामोदर गोस्वामी के सामने उनका उल्लेख भी नहीं किया होगा। इसलिए ये वर्णन भौतिक गतिविधि से बिल्कुल भी संबंधित नहीं हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)