श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 14: वृन्दावन लीलाओं का सम्पादन  »  श्लोक 154
 
 
श्लोक  2.14.154 
ए - कथा शुनिया प्रभुर आनन्द अपार ।
‘कह, कह, दामोद र’, - बले बार बार ॥154॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु को ये वर्णन सुनकर असीम प्रसन्नता हुई और उन्होंने बार-बार स्वरूप दामोदर से बोलना जारी रखने का अनुरोध किया।
 
Hearing this account, Mahaprabhu felt immense joy. He repeatedly requested Swarupa Damodara to continue speaking.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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