श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 13: रथयात्रा के समय महाप्रभु का भावमय नृत्य  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  2.13.97 
भाग्यवान्तुमि - इँहार हस्त - स्पर्श पाइला ।
आमार भाग्ये नाहि, तुमि कृतार्थ हैला ॥97॥
 
 
अनुवाद
राजा प्रतापरुद्र ने कहा, "आप बहुत भाग्यशाली हैं, क्योंकि आपको श्रीवास ठाकुर का स्पर्श प्राप्त हुआ है। मैं इतना भाग्यशाली नहीं हूँ। आपको उनका कृतज्ञ होना चाहिए।"
 
King Prataparudra said, "You are extremely fortunate, because Srivasa Thakura has blessed you with his touch. I am not so fortunate. You should feel grateful to him."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)