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श्लोक 2.13.24  |
ताँहार सम्मति लञा भक्ते सुख दिते ।
रथे चड़ि’ बाहिर हैल विहार करिते ॥24॥ |
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| अनुवाद |
| भाग्य की देवी से अनुमति लेकर भगवान रथ पर सवार होकर भक्तों के आनंद के लिए अपनी लीलाएं करने निकल पड़े। |
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| With Mahalakshmi's permission, the Lord came out to mount the chariot and perform His pastimes for the enjoyment of the devotees. |
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