श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 13: रथयात्रा के समय महाप्रभु का भावमय नृत्य  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.13.18 
महाप्रभु सुख पाइल से सेवा देखिते ।
महाप्रभुर कृपा हैल से - सेवा हइते ॥18॥
 
 
अनुवाद
राजा को ऐसी तुच्छ सेवा में संलग्न देखकर चैतन्य महाप्रभु अत्यंत प्रसन्न हुए। इस सेवा मात्र से ही राजा को भगवान की कृपा प्राप्त हुई।
 
Seeing the king engaged in such a humble service, Chaitanya Mahaprabhu was extremely pleased. It was through this service that the king received Mahaprabhu's blessings.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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