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श्री चैतन्य चरितामृत
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श्लोक 175
श्लोक
2.13.175
जगन्नाथ - सेवक यत राज - पात्र - गण ।
यात्रिक लोक, नीलाचल - वासी यत जन ॥175॥
अनुवाद
उन्होंने भगवान जगन्नाथ के सेवकों, सरकारी अधिकारियों, तीर्थयात्रियों, आम जनता और जगन्नाथ पुरी के सभी निवासियों के मन में यह भावना भर दी।
He irrigated the minds of Jagannathji's servants, government officials, pilgrims, general public and all the residents of Jagannath Puri.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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