प्राण - नाथ, शुन मोर सत्य निवेदन
व्रज - आमार सदन, ताहाँ तोमार सङ्गम, ।
ना पाइले ना रहे जीवन ॥138॥
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अनुवाद
"हे प्रभु, कृपया मेरी सच्ची प्रार्थना सुनें। मेरा घर वृंदावन है, और मैं वहाँ आपकी संगति चाहता हूँ। लेकिन अगर मुझे वह नहीं मिली, तो मेरे लिए अपना जीवन बचाना बहुत कठिन हो जाएगा।
"O Lord, please listen to my sincere request. My home is Vrindavan, and I seek your presence there. But if I don't receive your presence, my life will be difficult.
तात्पर्य
केवल जब मन पदवियों से मुक्त होता है, तो कोई सर्वोच्च भगवान के साथ मिलना चाह सकता है। मन में कोई न कोई व्यवसाय होना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को भौतिक चीजों से मुक्त होना है, तो उसका मन खाली नहीं हो सकता; चिंतन, भावना और इच्छा के विषय होने चाहिए। जब तक किसी का मन कृष्ण के विचारों, कृष्ण के लिए भावना और कृष्ण की सेवा करने की इच्छा से भरा नहीं होता है, वह मन भौतिक क्रियाकलापों से भरा रहेगा। जिन्होंने सभी भौतिक क्रियाकलापों को त्याग दिया है और उनके बारे में सोचना बंद कर दिया है, उन्हें हमेशा कृष्ण के बारे में सोचने की महत्वाकांक्षा रखनी चाहिए। कृष्ण के बिना, कोई जीवित नहीं रह सकता, जैसे कोई व्यक्ति अपने दिमाग के लिए कुछ आनंद के बिना जीवित नहीं रह सकता।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥