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श्लोक 113
श्लोक
2.13.113
“सेइ त पराण - नाथ पाइनु ।
याहा लागि’ मदन - दहने झुरि’ गेनु” ॥113॥
अनुवाद
“‘अब मैंने अपने जीवन के स्वामी को पा लिया है, जिनके अभाव में मैं कामदेव द्वारा जलाया जा रहा था और मुरझा रहा था।’”
“Now I have found the master of my life, without whom I was being burnt by Cupid and was drying up.”
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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