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श्लोक 2.13.112  |
ताण्डव - नृत्य छाड़ि’ स्वरूपेरे आज्ञा दिल ।
हृदय जानिया स्वरूप गाइते लागिल ॥112॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान ने नृत्य त्यागकर स्वरूप दामोदर को गाने का आदेश दिया। उनके मन की बात समझकर स्वरूप दामोदर ने इस प्रकार गाना आरम्भ किया। |
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| Mahaprabhu gave up dancing and commanded Swarup Damodar to sing. Understanding his thoughts, Swarup Damodar began singing as follows. |
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