श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 13: रथयात्रा के समय महाप्रभु का भावमय नृत्य  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.13.10 
कटि - तटे बद्ध, दृढ़ स्थूल पट्ट - डोरी ।
दुइ दिके दयिता - गण उठाय ताहा धरि’ ॥10॥
 
 
अनुवाद
भगवान जगन्नाथ विग्रह को कमर में रेशम की एक मज़बूत, मोटी रस्सी से बाँधा गया था। दोनों ओर से दैत्यों ने उस रस्सी को पकड़कर विग्रह को ऊपर उठाया।
 
A strong, thick silk rope was tied around the waist of the idol of Jagannath. The devotees grasped this rope from both sides and lifted the idol up.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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