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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 12: गुण्डिचा मन्दिर की सफाई  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  2.12.73 
तिन - जन - पाशे प्रभु हासिया कहिल।
गुण्डिचा - मन्दिर - मार्जन - सेवा मागि’ निल ॥73॥
 
 
अनुवाद
जब ये तीनों लोग भगवान के समक्ष आये, तो उन्होंने उनसे गुंडिका नामक मंदिर को धोने की अनुमति मांगी।
 
When these three arrived, Mahaprabhu asked them for permission to wash the Gundicha temple.
तात्पर्य
गुंडिचा मंदिर जगन्नाथ मंदिर से दो मील उत्तरपूर्व में स्थित है। रथ-यात्रा उत्सव के समय, भगवान जगन्नाथ अपने मूल मंदिर से गुंडिचा मंदिर जाते हैं और वहां एक सप्ताह तक रहते हैं। एक हफ्ते के बाद, वह अपने मूल मंदिर लौटते हैं। यह सुनने में आया है कि जगन्नाथ मंदिर को स्थापित करने वाले राजा इंद्रद्युम्न की पत्नी को गुंडिचा के नाम से जाना जाता था। आधिकारिक धर्मग्रंथों में भी गुंडिचा मंदिर के नाम का उल्लेख मिलता है। गुंडिचा मंदिर का क्षेत्रफल 288 हाथों और 215 हाथों का है (एक हाथ लगभग डेढ़ फीट होता है)। अंदर का मुख्य मंदिर लगभग 36 हाथों से 30 हाथों तक है और कीर्तन हॉल 32 हाथों से 30 हाथों तक है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)