सेइ हैते भाग्यवान्नाजा र नन्दन ।
प्रभु - भक्त - गण - मध्ये हैला एक - जन ॥68॥
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अनुवाद
तब से, वह भाग्यशाली राजकुमार भगवान के सबसे अंतरंग भक्तों में से एक बन गया।
From then on the fortunate prince became one of the most intimate devotees of Mahaprabhu.
तात्पर्य
इस सम्बन्ध में श्रील प्रबोधानन्द सरस्वती कहते हैं- यत्-कारुण्यकटाक्षवैभववताम्। यदि श्री चैतन्य महाप्रभु किसी पर क्षण भर भी कृपादृष्टि डालें, तो वह व्यक्ति तुरन्त ही प्रभु के अत्यन्त गोपनीय भक्त में बदल जाता है। राजकुमार पहली बार ही प्रभु को देखने आया था, पर प्रभु की कृपा से बालक तत्काल एक श्रेष्ठ भक्त बन गया। यह थ्योरी में नहीं, बल्कि व्यवहार में था। हम नग्न-मातृका-न्याय सूत्र लागू नहीं कर सकते। इसमें कहा गया है कि यदि किसी की माता बचपन में नग्न थी, तो उसे नग्न ही रहना चाहिए, यद्यपि वह कई बच्चों की माता बन गई हो। यदि कोई व्यक्ति वास्तव में प्रभु की कृपा से धन्य है, तो वह तुरन्त प्रभु का सर्वश्रेष्ठ भक्त बन सकता है। नग्न-मातृका का तर्क कहता है कि अगर एक व्यक्ति उस तारीख को ऊपर नहीं उठाया जाता है, तो वह रातोंरात एक महान भक्त नहीं बन सकता, जैसा वह था। यह विशेष उदाहरण उस सिद्धांत का खण्डन करने के लिए प्रमाण प्रस्तुत करता है। पिछले दिन, बालक केवल एक साधारण राजकुमार था, और अगले दिन उसे प्रभु के सर्वोच्च भक्तों में से एक माना गया। यह सब प्रभु की अकारण दया के कारण संभव हुआ। प्रभु सर्वशक्तिमान हैं- सर्वशक्तिमान या सर्वशक्तिमान- और वह अपनी इच्छानुसार कार्य कर सकते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥