यस्य देवे परा भक्ति यथा देवे तथा गुरु
तस्यैते कथिता ह्यर्थाः प्रकाशन्ते महात्मनः
"केवल उन महान आत्माओं के लिए जिनकी भगवान और आध्यात्मिक गुरु दोनों में दृढ़ आस्था है, वैदिक ज्ञान के सभी पाठ स्वचालित रूप से प्रकट होते हैं।" (श्वेताश्वतर उपनिषद 6.23)
इस प्रकार महाराज प्रतापरुद्र और अन्य भक्तों के पद चिन्हों पर चलते हुए, हमें भगवान सर्वोच्च व्यक्तित्व के सभी संबंधितों की पूजा करना सीखना चाहिए। इसे भगवान शिव ने तदीयनाम कहा है। पद्म पुराण में कहा गया है:
आराधनानां सर्वेषां विष्णोरारादनं परम
तस्मात् परतरं देवी तदीयानां समर्चनम्
"हे देवी, पूजा की सबसे श्रेष्ठ प्रणाली भगवान विष्णु की पूजा है। उससे भी बढ़कर तदीय यानी विष्णु से संबंधित किसी भी चीज की पूजा है।" श्री विष्णु सच्चिदानंद-विग्रह हैं। इसी तरह, कृष्ण के सबसे गोपनीय सेवक, आध्यात्मिक गुरु और विष्णु के सभी भक्त तदीय हैं। सच्चिदानंद-विग्रह, गुरु, वैष्णव और उनके द्वारा उपयोग की जाने वाली चीजों को तदीय माना जाना चाहिए और इसमें कोई संदेह नहीं कि सभी जीवों द्वारा उनकी पूजा की जानी चाहिए।
