Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93

Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 12: गुण्डिचा मन्दिर की सफाई  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.12.32 
याज्ञिक - ब्राह्मणी सब ताहाते प्रमाण ।
कृष्ण लागि’ पति - आगे छाड़िलेक प्राण ॥32॥
 
 
अनुवाद
उदाहरण के लिए, यज्ञ कर रहे ब्राह्मणों की कुछ पत्नियों ने कृष्ण के लिए अपने पतियों की उपस्थिति में अपने प्राण त्याग दिए।
 
“For example, some wives of Brahmins performing sacrifices gave up their lives for Krishna in front of their husbands.”
तात्पर्य
यह उस दिन की बात है, जब श्री कृष्ण और उनके चरवाहे बालक और पशुओं का झुंड मथुरा के निकट चरागाह में विराजित थे। उस समय चरवाहे बालक भूख के मारे बेहाल हो गये और खाना माँगने लगे। तब श्री कृष्ण ने उनसे कहा कि पास में ही ब्राह्मणगण यज्ञ या बलिदान करने में लगे हैं। तुम उनके पास जाओ और कुछ भोजन ले आओ। भगवान् के इस प्रकार आदेश पाकर सारे चरवाहे बालक ब्राह्मणों के पास पहुँचे और भोजन माँगा, पर उन्हें निराश होना पड़ा। इसके बाद चरवाहे बालकों ने ब्राह्मणों की पत्नियों से भोजन की भीख माँगी। ये सभी पत्नियाँ श्री कृष्ण की बहुत बड़ी भक्त थीं और उन्हें अगाध प्रेम था। जैसे ही उन्होंने चरवाहे बालकों की विनती सुनी और समझा कि कृष्ण को भोजन चाहिए तो वे तत्काल ही यज्ञ स्थान से चली गयीं। इस पर उनके पति ने उन्हें बहुत फटकारा और वे भी अपने प्राण त्यागने को तैयार हो गयीं। एक शुद्ध भक्त का स्वभाव होता है कि वह भगवान् की दिव्य प्रेममयी सेवा के लिए अपना जीवन त्याग दे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)