श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 12: गुण्डिचा मन्दिर की सफाई  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.12.24 
परमार्थ थाकुक - लोके करिबे निन्दन ।
लोके रहु - दामोदर करिबे भर्त्सन ॥24॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने आगे कहा, "आध्यात्मिक उन्नति की तो बात ही क्या, सभी लोग मेरी निन्दा करेंगे। और सभी लोगों की तो बात ही क्या, दामोदर मुझे दण्डित करेंगे।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu continued, "Forget about spiritual progress, everyone will criticize me. Forget about everyone else, even Damodara will criticize me."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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