श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 12: गुण्डिचा मन्दिर की सफाई  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.12.22 
यद्यपि शुनिया प्रभुर कोमल हय मन ।
तथापि बाहिरे कहे निष्ठुर वचन ॥22॥
 
 
अनुवाद
ये सब बातें सुनकर श्री चैतन्य महाप्रभु का मन तो नम्र हो गया, परन्तु बाह्य रूप से वे कुछ कठोर वचन बोलना चाहते थे।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu was certainly moved by hearing all this, but outwardly he wanted to say some harsh words.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)