भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु की आँखों की तुलना प्यासे भौंरों से की गई है, और श्री जगन्नाथ की आँखों की तुलना खिले हुए कमल के फूलों से की गई है। लेखक ने भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु के भगवान जगन्नाथ के प्रति गहन प्रेम में डूबे होने का वर्णन करने के लिए इन तुलनाओं का उपयोग किया है।
