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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 12: गुण्डिचा मन्दिर की सफाई  »  श्लोक 210
 
 
श्लोक  2.12.210 
दर्शन - लोभेते करि’ मर्यादा लङ्घन ।
भोग - मण्डपे यात्रा करे श्री - मुख दर्शन ॥210॥
 
 
अनुवाद
भगवान के दर्शन की तीव्र इच्छा के कारण, वे सभी नियम-सिद्धान्तों की उपेक्षा कर, केवल भगवान का मुख देखने के लिए, उस स्थान पर चले गए जहाँ भोजन परोसा गया था।
 
Due to their extreme eagerness to see the Lord, they all ignored the rituals and went to the Bhoga temple just to see the face of the Lord.
तात्पर्य
देवता पूजन के बहुत से नियम हैं। जैसे कि, जिस कमरे में भगवान जगन्नाथ को भोग अर्पित किया जाता है, उसमे जाना वर्जित है। किन्तु इस बार, लोग इतने उत्सुक थे कि उन्होंने 15 दिनों से भगवान के दर्शन नहीं किए थे, तो सभी ने नियम को नज़रअंदाज़ कर दिया और उस कमरे में प्रवेश कर गए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)