श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 12: गुण्डिचा मन्दिर की सफाई  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.12.21 
देखिब से मुख - चन्द्र नयन भरिया ।
धरिब से पाद - पद्म हृदये तुलिया ॥21॥
 
 
अनुवाद
नित्यानंद प्रभु ने आगे कहा, "राजा ने श्री चैतन्य महाप्रभु के चंद्र-सदृश मुख को अपनी आँखों से पूर्ण संतुष्टिपूर्वक देखने की इच्छा भी व्यक्त की। वह भगवान के चरणकमलों को अपने हृदय में धारण करना चाहते हैं।"
 
Nityananda Prabhu continued, "The king has also expressed his desire to gaze upon Mahaprabhu's moon-like face. He wants to lift Mahaprabhu's lotus feet and place them on his heart."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd