श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 12: गुण्डिचा मन्दिर की सफाई  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.12.18 
नित्यानन्द कहे , - तोमाय चाहि निवेदिते ।
ना कहिले रहिते नारि, कहिते भय चित्ते ॥18॥
 
 
अनुवाद
नित्यानंद प्रभु ने तब कहा, "हम आपसे कुछ कहना चाहते हैं। हालाँकि हम बिना बोले नहीं रह सकते, फिर भी हमें बोलने में बहुत डर लगता है।"
 
Then Nityananda Prabhu said, "I want to tell you something. Although I cannot help but say it, I am extremely afraid to say it.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas