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श्लोक 2.12.173  |
स्वरूप - गोसाञि भाल मिष्ट - प्रसाद लञा ।
प्रभुके निवेदन करे आगे दाण्डाजा ॥173॥ |
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| अनुवाद |
| तब स्वरूप दामोदर गोस्वामी कुछ उत्तम मिष्ठान्न लाए और भगवान के समक्ष खड़े होकर उन्हें अर्पित किया। |
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| Then Swarup Damodar Gosain brought some delicious sweets and standing before Mahaprabhu offered them to Him. |
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