श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 12: गुण्डिचा मन्दिर की सफाई  »  श्लोक 150
 
 
श्लोक  2.12.150 
एइ लीला वर्णियाछेन दास वृन्दावन ।
अतएव सङ्क्षेप करि’ करिलुँ वर्णन ॥150॥
 
 
अनुवाद
इस घटना का वर्णन वृन्दावनदास ठाकुर ने विस्तार से किया है। अतः मैंने इसका वर्णन संक्षेप में ही किया है।
 
Vrindavan Das Thakur has described this incident in detail, hence I have narrated it briefly.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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