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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 12: गुण्डिचा मन्दिर की सफाई  »  श्लोक 150
 
 
श्लोक  2.12.150 
एइ लीला वर्णियाछेन दास वृन्दावन ।
अतएव सङ्क्षेप करि’ करिलुँ वर्णन ॥150॥
 
 
अनुवाद
इस घटना का वर्णन वृन्दावनदास ठाकुर ने विस्तार से किया है। अतः मैंने इसका वर्णन संक्षेप में ही किया है।
 
Vrindavan Das Thakur has described this incident in detail, hence I have narrated it briefly.
तात्पर्य
यह शिष्टाचार का मामला है। यदि कोई पूर्व आचार्य किसी चीज़ के बारे में पहले ही लिख चुका है, तो उसे व्यक्तिगत सुख या पूर्व आचार्य से श्रेष्ठ दिखाने के लिए दोबारा लिखने की आवश्यकता नहीं है। जब तक इसमें कोई निश्चित सुधार न हो, किसी को दोबारा नहीं लिखना चाहिए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)