श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 12: गुण्डिचा मन्दिर की सफाई  »  श्लोक 148
 
 
श्लोक  2.12.148 
तबे महाप्रभु ताँर बुके हस्त दिल ।
‘उठह गोपा ल’ बलि’ उच्चैःस्वरे कहिल ॥148॥
 
 
अनुवाद
तब श्री चैतन्य महाप्रभु ने अपना हाथ श्री गोपाल की छाती पर रखा और ऊंचे स्वर में कहा, “गोपाल, खड़े हो जाओ।”
 
Then Sri Chaitanya Mahaprabhu placed his hand on Sri Gopal's chest and said loudly, "Gopal, get up!"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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