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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 12: गुण्डिचा मन्दिर की सफाई  »  श्लोक 136
 
 
श्लोक  2.12.136 
नृसिंह - मन्दिर - भितर - बाहिर शोधिल ।
क्षणेक विश्राम करि’ नृत्य आरम्भिल ॥136॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने नृसिंह मंदिर को भी भीतर और बाहर से शुद्ध किया। अंत में, उन्होंने कुछ क्षण विश्राम किया और फिर नृत्य करने लगे।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu also cleaned the Nrisimha temple, inside and out. Finally, he rested for a few minutes and then resumed his dance.
तात्पर्य
गुण्‍डीचा मंदिर के बाहर ही नृसिंह मंदिर है जो एक सुंदर मंदिर है। इस मंदिर में नृसिंह चतुर्दशी के दिन बहुत बड़ा उत्‍सव होता है। नबद्वीप में भी एक नृसिंह मंदिर है जहाँ इसी उत्‍सव को मनाया जाता है, जैसा कि मुरा‍री गुप्‍त ने अपनी पुस्‍तक चैत्‍न्‍य-चरित में वर्णन किया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)