vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 12: गुण्डिचा मन्दिर की सफाई
»
श्लोक 123
श्लोक
2.12.123
सेइ जल लञा आपने पान कैल ।
ताहा देखि’ प्रभुर मने दुःख रोष हैल ॥123॥
अनुवाद
तब गौड़ीय वैष्णव ने वह जल स्वयं पी लिया। यह देखकर श्री चैतन्य महाप्रभु थोड़े दुखी हुए और बाहर से क्रोधित भी हुए।
Then the Gaudiya Vaishnava took the water and drank it. Seeing this, Sri Chaitanya Mahaprabhu became somewhat saddened and outwardly angry.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×