श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 12: गुण्डिचा मन्दिर की सफाई  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  2.12.112 
‘कृष्ण’ ‘कृष्ण’ कहि’ करे घटेर प्रार्थन ।
‘कृष्ण’ ‘कृष्ण’ कहि’ करे घट समर्पण ॥112॥
 
 
अनुवाद
एक व्यक्ति ने “कृष्ण, कृष्ण” पवित्र नाम का जाप करते हुए जल का पात्र मांगा, और दूसरे ने “कृष्ण, कृष्ण” का जाप करते हुए पात्र दिया।
 
Someone was asking for the pot saying “Krishna, Krishna” and someone else was giving the pot saying “Krishna, Krishna”.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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