श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  2.11.97 
भट्टाचार्य कहे एइ मधुर वचन ।
चैतन्येर सृष्टि - एइ प्रेम - सङ्कीर्तन ॥97॥
 
 
अनुवाद
सार्वभौम भट्टाचार्य ने उत्तर दिया, "यह मधुर दिव्य ध्वनि भगवान की एक विशेष रचना है जिसे प्रेम-संकीर्तन के रूप में जाना जाता है, जो भगवान के प्रेम में सामूहिक जप है।
 
Sarvabhauma Bhattacharya said, “This sweet transcendental sound is a special creation of Mahaprabhu, which is called prema-sankirtan.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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