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श्लोक 2.11.81  |
प्रभुर सेवा करिते पुरी आज्ञा दिल ।
अतएव प्रभु इँहाके निकटे राखिल ॥81॥ |
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| अनुवाद |
| ईश्वर पुरी ने गोविंद को श्री चैतन्य महाप्रभु की सेवा करने का आदेश दिया। इस प्रकार भगवान उन्हें अपने पास रखते हैं। |
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| "Ishvara Puri commanded Govinda to serve Sri Chaitanya Mahaprabhu. Therefore, Mahaprabhu keeps him with himself." |
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